30 जून पश्चात भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य क्या?

Economy

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30 जून पश्चात भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य क्या*
मैं, आज जब देश की  अर्थव्यवस्था व आर्थिक स्थिति के भविष्य के बारे में सोचने बैठता हूं तो एक बड़ा अंधकार सा नजर आ रहा है। 3 महीने के लिए बैंकों की किस्तें  रिजर्व बैंक ने बढ़ाने के लिए बोला है। मगर उसी स्फूर्ति के साथ बैंकों द्वारा कोई भी बयान सामने नहीं आ रहा है। राजस्व विभाग के भी देयगी 3 माह के लिए स्थगित हो गई । उस के बाद क्या?
मेरा, बी सी भरतिया का सोचना है की बडी  उद्योग कम्पनियां उनका माल नहीं बिका बोलकर अपने सप्लायर्स को पैसा देगी कि नहीं देगी? यह चिंता का विषय खड़ा है। सरकारी विभागों में जो माल बेचा गया उसका पैसा कब मिलेगा यह एक सवाल है। कही ऐसा बोल कर की उपर से पैसे जब आएंगे तब मिलेगा। सरकार के माध्यम से कई लोग टीवी पर आ रहे हैं और बता रहे हैं कि किराएदार से मकान मालिक पैसा ना ले। आगे किस्तो में पैसे ले। मगर यह नहीं बोल रहे की जिन्होंने पैसे उधार दे रखे है वे ब्याज स्थगित कर दें।
यानी जहां जहां से पैसे देने वाले हैं वह पैसे ना दे, मगर व्यापारी सरकारी खजाने में कर भी जमा कराएं, कर्मचारी को भी पैसे दे, बिजली के भी पैसे दे और अभी जो तकलीफ चल रही है, उसमें सब संस्थाओं को चंदा भी दें। हर प्रकार से जहां भी देने का काम है, वह व्यापारी करता रहे।
अगर यह सोच विकसित हो गई तो जो अर्थव्यवस्था को जीवित रखते हैं, व्यवसाय करने वाले लोग हैं, जो निर्माता लोग हैं, जो बाजार में माल लाने वाले लोग हैं, इनके पास पैसे कहां से आएंगे? ऐसा लग रहा है की यह कोई सोच नहीं रहा। हर एक के पास माल या सेवा के पैसे भुगतान नहीं करने के बहाने हैं।
अब इसके विपरीत अगर हम चलते हैं। तो जो कर वसूलने वाली संस्थाएं हैं, जो सरकार का राजस्व वसूल करने वाली संस्थाएं हैं, यह सरकार का एक भी पैसा छोड़ने या स्थगित करने  तैयार नहीं है । जो सरकारी सेवाएं देने वाली संस्थाएं हैं जैसे बिजली हो, फोन हो या कोई भी हो, वे बगैर पैसे सेवाएं देने के लिए मना कर सकती है।
इस परिपेक्ष में हमारी अर्थव्यवस्था, हमारा बाजार आदि 30 जून के बाद कैसे चलेंगे इसके बारे में गहन चिंतन मंथन करना जरूरी है।
जब मैं बैंकों की कार्यशैली या कर वसूली करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली देखता हूं, तो हम देखते हैं, जैसे ही पैसा बैंक में आता है, तो बैंक वाला अपना ब्याज, उसके जायज या नाजायज  खर्चों की मांग है, वे तुरंत हमारे खाते से काट लेती हैं । इसके बाद अगर सरकारी कर का भुगतान नहीं हुआ, तो वह हमारे बैंक खाते अटैच कर लेती है । अब परिस्थिति  जुन के बाद की देखें। व्यापारी के पुराने पैसे आएंगे कि नहीं आएंगे समय बताएगा। अब जो भी पैसे वह बैंक खाते में डालेगा, बैंक सबसे पहले अपने पैसे उसमें से काटेंगे। व्यापार करने के लिए पैसे कम हो गए। इसके बाद अगर राजस्व/कर विभागों की मांग होगी कोई, तो वह बैंक अटैच कर लेंगे। इसका मतलब  जो भी पैसे आएंगे वह बैंक में जमा होते रहेंगे, मगर व्यापारी के काम नहीं आएंगे। ऐसी परिस्थिति में व्यापारी कैसे व्यापार कर सकेगा। इसके बारे में सोचना अति आवश्यक है। अगर आपने एक बैंक से कर्जा लिया है तो दूसरे बैंक में खाता खोलने नहीं देते। कुल मिलाकर व्यापारी ऐसी परिस्थिति में फंस जाएगा कि उसे व्यापार करने में बहुत बड़ा संकट आ सकता है। ऐसा मैं समझता हूं।
B C BHARTIA
National President
Confederation of all India Traders, New Delhi
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