कोषिश ई-वे बिल समजने की और समजाने की.

e way bill

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ई-वे बिल लागू हो गया हैं। पर अभी भी कारोबारियों को उसे लेकर कई सारे कन्फ्यूजन हैं।  ई-वे बिल में कितने तरह के फॉर्म हैं और उन्हें कैसे यूज करना है। सरकार ने ई-वे बिल में चार तरह के फॉर्म बनाए हैं, जो कारोबारियों की कैटेगरी के हिसाब से हैं।
4 तरह के हैं ई-वे बिल

  • ई-वे बिल-1
    ई वे बिल1 गुड्स के लिए है। यानी डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर जो 50 हजार रुपए का स्टॉक एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजेगा वह ई-वे बिल-1 फॉर्म भरेगा। ये ई-वे बिल सबके लिए एक है।
    जिसमे खरीदने वाले का GSTIN, डिलीवरी करने की जगह का PIN कोड, इनवॉइस नंबर, डेट, गुड्स की वैल्यू, HSN कोड भरना होगा।

 

  • ई-वे बिल-2
    ई वे बिल2 ट्रासपोटर्स को भरना है। कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल, ई वे बिल-2 फॉर्म के जरिए भरा जाएगा। एक ही व्हीकल में अलग-अलग डीलर्स का सामान, अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी का सामान भेजने पर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल भरना होगा। ये कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स को भरना होगा। ट्रांसपोर्टर्स अगल-अगल डीलर्स के लिए एक कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बना सकता है।

 

  • ई-वे बिल-3
    ई वे बिल-3 वैरिफिकेशन फॉर्म है जिसे जीएसटी अधिकारी भरेंगे। इस फॉर्म में प्रोडक्ट ले जा रहे है व्हीकल की जानकारी जैसे व्हीकल नंबर, ट्रांसपोर्टर और डीलर का नाम और नंबर भरा जाएगा। ये फॉर्म जीएसटी अधिकारी चेकिंग के समय भरेंगे। इसके अलावा इस फॉर्म में प्रोडक्ट की जानकारी होगी। ये फॉर्म डीलर, ट्रांसपोर्टर और जीएसटी अधिकारी कोई भी चेक कर सकता है।

 

  • ई-वे बिल-4
    ई वे बिल4 डिटेन्शन फॉर्म है। यानी एक जीएसटी अधिकारी ने अगर 50 ट्रक को वैरिफाई किया है और उसमें से अगर 4 में अधिकारी को कुछ गढ़बढ़ लगता है, तो वह उन व्हीकल और प्रोडक्ट को जब्त कर लेगा। अधिकारी जिन भी ट्रक या प्रोडक्ट को जब्त करता है, वह उसकी जानकारी ईवे बिल-4 में भरेगा। ईवे बिल-4 में भरी जानकारी ट्रांसपोर्टर, डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर ऑनलाइन स्वयं भी चेक कर सकते हैं कि उनके कौनसे ट्रक जीएसटी अधिकारी ने जब्त कर लिए हैं।

◆ फॉर्म के अलावा E-WAY बिल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी:

1. यह एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजने पर लागू होगा (कुछ राज्यो में ये वही उसी राज्य में माल भेजने पर भी लागू होगा उन राज्यो के नाम point 12 में लिखे हैं।

2. हर रजिस्टर्ड सप्लायर को माल भेजने से पहले E-WAY बिल GENERATE करना होगा और उस E-WAY बिल का नंबर या प्रिंटआउट बिल के साथ लगाना होगा।

3. जो माल भेजा जा रहा है वह चाहे किसी भी उद्देश्य जैसे जॉब वर्क, ब्रांच ट्रान्सफर, रिपेयर, सेल आदि के लिये हो और उस माल की कीमत 50 हजार से ज्यादा हो तो E-WAY बिल GENERATE करना अनिवार्य है I

4. यदि एक ही VEHICLE में एक से ज्यादा पार्टियों को माल भेजा जाता है और उस सारे माल की कीमत 50 हजार से ज्यादा हो जाती है तब भी E-WAY बिल GENERATE करना अनिवार्य है।

5. यदि कोई क्रेता UNREGISTERED SUPPLER से PURCHASE करता है और उस माल की कीमत 50 हजार से ज्यादा है तो उस स्थिति में क्रेता को E-WAY बिल GENERATE करना होगा I

6. यदि माल JOB WORK के लिये दूसरे राज्य में जा रहा है तो E-WAY बिल GENERATE करना compulsory है और ये करने की जिमेदारी principal की है।

7. यदि SUPPLIER ने E-WAY बिल GENERATE कर लिया है और किसी कारण से माल नहीं भेजा जा सका तो यह E-WAY बिल 24 घंटे के अन्दर कैंसिल किया जा सकता I यदि फ़ॉर्म किसी अधिकारी द्वारा वेरिफ़ाई कर दिया गया तो फिर फ़ॉर्म कैन्सल नहीं किया जा सकता।

8. E-WAY बिल GENERATE करने के बाद माल क्रेता के पास पहुँचने की समय सीमा निम्न प्रकार है :-
दूरी समय सीमा
100 किमी 24 घंटे
200 किमी 48 घंटे
300 किमी 72 घंटे
इसी प्रकार हर 100 किमी के लिये 24 घंटे I

9. यदि माल NON MOTOR VEHICLE (रिक्शा, बुग्गी) में भेजा जाता है तो. E-WAY बिल के नियम लागू नहीं होंगे  चाहे माल की वैल्यू कितनी भी क्यों न हो I

10. जिन वस्तुओं पर GST नहीं लगता उस माल को भेजने के लिये भी. E-WAY बिल की जरुरत नहीं है I

11. Handicraft goods अगर एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजा जाएगा तो. E-way bill बनाना जरूरी है चाहे वैल्यू कितनी भी हो।

12. Andhra Pradesh, Arunachal Pradesh, Bihar, Haryana, Jharkhand, Karnataka, Kerala, Puducherry, Sikkim, Tamilnadu, Telangana, Uttar Pradesh, Uttarakhand।

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