गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) – केंद्र सरकार कि बड़ी सौगात !!

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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के दायरे में आने वाले करोड़ों कारोबारियों को केंद्र सरकार जल्द ही एक बड़ी सौगात देने जा रही है। इन कारोबारियों को हर महीने 3 रिटर्न फाइल करने की बाध्यता से मुक्ति मिलने वाली है। इससे कारोबारी अपना बिजनेस आसानी से कर सकेंगे।

मंत्रियों के समूह ने दी मंजूरी
जीएसटी काउंसिल द्वारा गठित किए गए मंत्रियों के समूह ने इस सौगात के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। 4 मई (शुक्रवार) को होने वाली जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा।

जीएसटीएन सेमी-ऑटोमेटिक तरीके से करेगा रिटर्न जारी
जीएसटीएन नेटवर्क (सिस्टम) हर महीने अपलोड होने वाली सप्लाई डाटा और सप्लाई होने के मंजूरी के डाटा को देखकर के रिटर्न को सेमी-ऑटोमेटिक तरीके से जारी करेगा। सिस्टम में इस तरह का बदलाव किया गया कि माल खरीदने वाला व्यक्ति (बायर) उस बिल को लॉक कर सकेगा, जिसके बाद विक्रेता उसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं कर पायेगा।

अधिकारी करेंगे जांच
टैक्स की चोरी रोकने के लिए सिस्टम हर तिमाही पर एक ऐसी लिस्ट को जेनरेट करेगा, जिससे टैक्स जमा न करने वाले डिफॉल्टरों पर नजर रखी जा सकेगी। टैक्स अधिकारी फिर ऐसे कारोबारियों पर नकेल भी कसेंगे। बड़े डिफॉल्टर से एडवांस में टैक्स जमा कराने के लिए कहा जाएगा।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की अगुवाई वाले एक मंत्री समूह ने मंगलवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का रिटर्न दाखिल करने के लिए एक नए आसान मॉडल को मंजूरी दे दी है। इस नए मॉडल के आधार पर आपूर्तिकर्ता द्वारा बिक्री के इनवॉइस अपलोड करने के बाद तात्कालिक आधार पर क्रेडिट दिया जाएगा।

सरल किया 3बी फॉर्म

इससे पहले केंद्र सरकार ने जीएसटी रिर्टन के फॉर्म 3बी अब काफी सरल कर दिया था। जीएसटी नेटवर्क ने फॉर्म 3बी में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसके बाद कारोबारियों को रिटर्न भरने में बहुत आसानी हो जाएगी।

टैक्स का पेमेंट होगा आसान
पहले कारोबारियों को अपनी टैक्स की देनदारी का पता करने के लिए रिटर्न को सबमिट करना पड़ता था, जिसके बाद किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता था। लेकि अब टैक्स देनदारी का पता रिटर्न सबमिट करने से पहले ही पता चल जाएगा।

चालान का होगा ऑटो जेनरेशन
अब नए फॉर्म में टैक्स पेमेंट करने का चालान ऑटो जेनरेट होगा। यह इनपुट टैक्स क्रेडिट के अलावा होगा। इसके अलावा टैक्सपेयर के पास क्रेडिट राशि को एडिट करने का ऑप्शन भी होगा।

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